Dean Message

 

मैं विगत 22 वर्षों से सरस्वती देवयन्तो हवन्ते के पूजारी जन्नूभाई द्वारा स्थापित एवं विकसित राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड टू बी) विश्वविद्यालय में कार्यरत हॅू विद्यापीठ विश्वविद्यालय ही नहीं उससे भी कुछ अधिक है जिसे परिभाषित करना कठिन हैं।

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Mangalmurti Indira Gandhi Janta College


प्रस्तावना:-

 

देष की आजादी के पष्चात हमारे सपनों का भारत निर्मित होने लगा था। इस निर्माण के अनेक बाधक तत्वों में एक प्रमुख तत्व अषिक्षा भी था। अषिक्षा को दूर करने के लिए सरकार तथा स्वयं स्ेावी संस्थाओं ने अपने-अपने स्तर पर प्रयत्न आरम्भ किए । राजस्थान विद्यापीठ-जनचेतना के प्रसार एवं षिक्षा के क्षेत्र में नये क्षितिजों को प्राप्त करने में सदैव अग्रणी रही है। भारत सरकार द्वारा संस्था के पूर्ववर्ती योगदान एवं निष्ठा को देखते हुए जनता काॅलेज, डबोक को यह दायित्व सौंपा गया ।

 

स्थापनाः-

 

ग्राम्य-नेतृत्व प्रषिक्षण की दृष्टि से डेंनमार्क फाॅक हाई स्कूल के आधार पर जनता काॅलेज का श्री गणेष 16 जुलाई, 1953 को प्रबुद्ध प्रणेता संस्थापक कुलपति,समाज सेवी पं. जनार्दनराय नागर के दिषा निर्देषन में भारत सरकार एवम् राज्य सरकार की सहायता से उदयपुर शहर से 20 किलोमीटर दूर उदयपुर ,चित्तौड़गढ़ मार्ग पर डबोक ग्राम के समीप ग्रामीण वातावरण में काॅलेज की स्थापना हुई। अपने स्थापना के वर्ष से यह संस्था राजस्थान के विभिन्न अंचलों की सेवा अपनी गतिविधियों के माध्यम से करती आरही है।

 

उद्देश्यः-

 

काॅलेज की स्थापना का मुख्य उद्देष्य ग्रामीण क्षेत्र की जनता, विषेषकर आर्थिक दृष्टि से कमजोर तथा पिछड़े समुदाय को अषिक्षा से मुक्ति दिलाना तथा सामाजिक चेतना व जनतांत्रिक विचारधारा का प्रचार-प्रसार करना एवं प्रसार कार्यकत्ताओं को प्रषिक्षित करना है।

  • अषिक्षित समाज को जागरूक करने के लिए उचित वतावरण एवं अवसर का निर्माण करना।
  • ग्रामीण युवकों में राष्ट्रीय भावना को प्रबल करने तथा आदर्ष नागरिक के रूप में जीवन यापन के लिये प्रषिक्षित करना ।
  • पर्यावरण के प्रति सजगता एवं जनचेतना विकसित करना।
  • गा्रम्य अंचल में महिला चेतना जागृत करना ।
  • समाज में चिकित्सा एवं जनसंख्या षिक्षा चेतना विकसित करना।
  • गाॅव में प्राथामिक विद्यालयों के अध्यापकों को साक्षरता एवं सतत् षिक्षा केन्दों के संचालन हेतु प्रषिक्षित करना ।
  • ग्रामीण युवकों तथा महिलाओं में व्यावसायिक दक्षता का विकास करना।
  • युवको के चारित्रिक मनोबल को उन्नत करना और उनके दायित्व में सौपे कार्य के निर्वहन में जनहित एवं राष्ट्रीयता का दृष्टिकोण सुदृढ़ करना।
  • ग्राम्य अंचल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सेवाऐं प्रदान करना।

 

प्रवृत्तियां

काॅलेज की सम्स्त प्रवृत्तियां साक्ष्चिकित्सा तथा सामुदायिक विकास के अन्र्तगत निहित हैं। अतः राज्य सरकार के षिक्षा विभाग एवं विकास विभाग द्वारा काॅलेज एक प्रषिक्षण एवं अनुसंधान केन्द्र के रूप में मान्यता प्राप्त

  • संस्थागत प्रवृत्ति परिचय 1. प्रषिक्षण (क) मुख्य प्रषिक्षण:- पंचायत राज जन प्रतिनिधि प्रषिक्षण 1, साक्षरता प्रेरक प्रषिक्षण 2. षिषु षिक्षा अनुदेषक प्रषिक्षण 3. आंगनवाड़ी प्रषिक्षण (ख) सह प्रषिक्षणः- 1. ग्रीष्मावकाष व्यावसायिक प्रषिक्षण 2. षिक्षाकर्मी प्रषिक्षण 3. बन्धेज कला प्रषिक्षण 4. बाटिक कला प्रषिक्षण 5. सिलाई प्रषिक्षण 6. महिला व्यावसायिक प्रषिक्षण
  • विस्तार कार्य 1. कृषक प्रजातान्त्रिक षिविर 2. युवा नेतृत्व षिविर 3. महिला चेतना षिविर 4. स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम 5. साक्षरता कार्यक्रम 6. पुस्तकालय सेवा 7. पर्यावरण चेतना
  • प्रवृत्तियां 1. प्रषिक्षण 2. विस्तार कार्य 3. कृषि प्रषिक्षण 4. उत्सव एवं पर्व
  • मूल्यांकन एवं शोध कार्य 1. साक्षरता मूल्यांकन 2. आदिवासी बालिका एवं महिला षिक्षा,साक्षरता,सतत् षिक्षा,षिषु षिक्षा,पर्यावरण विषय के शोध कार्य
  • परियोजना (अ) समन्वित जनसंख्या विकास परियोजना 1. परिवार परामर्ष केन्द्र 2. जेण्डर ट्रेनिगं 3. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रषिक्षण (ब) प्रस्तावित 1. जिला मातृ षिषु स्वास्थ्य परियोजना

 

कार्यक्षेत्र

 

काॅलेज का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण राजस्थान ही रहा है।सर्वप्रथम राज्य स्तरीय पंचायतराज प्रषिक्षण संचालित किया गया । विस्तार कार्यक्रमों के अन्र्तगत वर्तमान में उदयपुर जिले की मावली ,भीण्डर , गिर्वा,बड़गाॅव, पंचायत समिति कार्यक्षेत्र है। काॅलेज द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रषिक्षण केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। इन परियोजनाओं में दक्षिण-पष्चिम राजस्थान के प्रषिक्षणाथर््ीा एवं छात्र सेवा से लाभान्वित हो रहे हैं ।

 

आम लोगों के जीवन से जुड़े मुद्दों स्वास्थ्य, शिक्षा, लिंग भेद, महिला हिंसा जीवन कौशल, एच.आई.वी. एड्स आदि पर महिलाओं व आँगनवाड़ी प्रशिक्षणार्थियों के लिये निम्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

 

HIV/ADIS पर 6 कार्यक्रम आयोजित किये गये जिसमें 214 महिलाओं को HIV/ADIS फैलने के कारण, बचाव के उपाय के बारे में जानकारी दी गई, संबंधित व्यक्ति के साथ सामान्य व्यवहार करना चाहिये, संबल देना चाहिये, A.R.T. Center पर इलाज कराना चाहिये व एच.आई.वी./एड्स ग्रस्त लोगों को नेटवर्क से जोड़ना चाहिये।


स्वच्छता के साथ पीने के पानी का रखरखाव, बेकार पानी की निकासी, मानवमल का सुरक्षित निपटान, कुडा करकट व गोबर का निपटान पर व भोजन की स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वच्छता व सामुदायिक स्वच्छता पर चर्चा की गई जिससे स्वच्छ भारत, स्वस्थ्य भारत का सपना साकार हो सके। कार्याशाला का संयोजक चित्तरंजन नागदा ने किया।

 

जेण्डर एवं महिला हिंसा पर 6 कार्यशाला का कार्यक्रम आयोजित किये गये जिसमें 224 महिलाओं को सामाजिक स्थिति, अवसर में असमानता काम के बंटवारे में भेद निर्णय में भागीदारी की कमी पर चर्चा की गई साथ ही महिलाओं के साथ होने वाली शारीरिक, मानसिक, आर्थिक व यौनिक हिंसा पर चर्चा कर बचाव के उपायों पर चर्चा की गई। मुख्य वक्ता डाॅ. मंजु माण्डोत थी संयोजक चित्तरंजन नागदा ने किया।

 

जीवन कौशल विकास के 6 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये गये। जिसमें 230 महिलाओं को जीवन कौशल प्रषिक्षित किया गया। जो सकारात्मक दृष्टिकोण बनाने में मददगार है तथा रोजमर्रा की जिन्दगी की मांग व चुनौतियों का सामना करने में सक्षम करते है। जीवन कौशल के माध्यम से जीवन को बेहतरीन से जी सकते है जिसमें 10 जीवन कौशल स्वजागरूकता, समानुभूति, सृजनात्मक चिंतन, निर्णय लेना, समस्या समाधान, प्रभावी संप्रेषण, अन्र्तवैयक्ति संबंध भावनाओं का समायोजन व तनाव का समायोजन की महत्ती भूमिका है। मुख्य वक्ता चितरंजन नागदा थे।